वो बचपन की यादे, वो मासूम सा चहेरा,
वो हँसना खिलखिलाना, वो, बात-बात पर रोना,
वो छोटा सा पलंग,और माँ के आँचल की छावों
वो पापा की डाट, और उसमे छिपा प्यार और दुलार,
आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!
वो धूल में खेलना, और मिट्टी को खाना,
बात -बात पर रूठना और जिद करना,
वो बाबा की डाट और दादी का प्यार,
वो पतली सी गलियां,सड़को पे खेलना,
आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!
स्कूल जाना और उसके लिए रोज मां से २ रुपये की रिश्वत लेना,
वो मैडम की डाट, मास्टर की फटकार,
वो मस्ती, दोस्तों की गपशप और कभी स्कूल से फरार,
स्कूल का नाम और वो शीतल पेड़ों की छावों वाला गांव,
आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!
वो महेमान का घर पर आना और मुझे पैसे देना,
कितना खुश हुआ करता था मन उस छोटी सी दौलत से,
दिल कहता था की उनके इक बार कहने पर ही ले लू,
पर कुछ देर के नखरे या कहे लो बचपन वाली शराफत,
वो सब आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!
वो हांडी वाला दूध और उस पर मोटी सी मलाई,
वो चूल्हे की रोटी, और वो आम की खटाई,
वो मक्खन और वो लाल वाली मिठाई,
वो ऊँची वाली अटारी और मेरी कम लम्बाई,
वो आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!
वो पतली सी डगर , और खेतो की सैर,
मेरी साँप वाली पतंग,और उसकी लम्बी सी डोर,
वो पिंकी,कामिनी और रामू से उनकी पतंग काटने की होड़,
वो बड़ी वाली बातें और छोटी वाली हार,
वो आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!
पापा के साथ बाजार जाना और फिर उस छोटे से जहाज की मांग,
वो दूकान वाले भईया भी, मेरी थोड़ी सी सिफारिश कर दिया करते थे,
वो बड़ा सा तोहफा और छोटा सा दाम,
आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है !!
वो कागज़ वाली नाव और गड्ढे वाला पानी,
वो गिल्ली डंडे वाला खेल और छुक -छुक वाली रेल,
वो बचपन वाला प्यार और लंगोटिया यार,
वो छुपनचछुपाई वाला खेल और मेरी वो गुलेल,
वो सब आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!
वो होली के रंग, वो पटाखो वाली दिवाली,
और वो छोटी सी कलाई पर रंगीन राखी,
वो रंग बिरंगे कपडे और लाला जी की मिठाई,
सर्दियों वाली मूंगफली और गर्मियों वाली कुल्फी,
वो छोटे से दिन और छोटी वाली रात,
आज भी याद आता है!
वो बचपन की बात याद आता है !!

No comments:
Post a Comment