Friday, November 10, 2023

बेबस किसान की भगवा न से प्रार्थना

हे! प्रभु कुछ हम पर भी रहें करो,
कुछ दौलत नहीं मांगता बस थोड़ी सी गीली बरसात करो,
कुछ अरमानो के साथ की थी फसल,
सोचा न था की होगी कुदरत की ऐसी उथल- पुथल,
कुछ  दिन  बाद बिटिया की बारात है,
बस उसी के लिए जोड़े कए हाथ है,
लड़के वालो को गाड़ी,और पैसा चाहिये,
हमको आपसे बस थोड़ी सी मदद चाहिए,
बच्चों की स्कूल की फीस भी बाकी है, 
छोटू का बस्ता,पेन और पेंसिल भी बाकि है,
अगले महीने होली का त्यौहार है,,
कुछ कपडे, मिठाइ और कपडे भी लेने है,
पिछली बार धान किया तो कर्ज भी न निपट सका,
तो इस बार किया कुछ ईख और कुछ कपास,
अब तो कर्ज फिर से बढ़ गया,
क्या करू भगवन मई बेबस हो गया, 
हे प्रभु तुम करो कुछ चमत्कार,
ज्यादा नहीं बस थोड़ा सा उपकार,
आज बिटिया को बारात के कपडे लेने को कहा था,
दिन भर बीत गया कुछ इंतज़ाम भी न हो सका,





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