Monday, September 10, 2018

Our home on the horizon!!

Hey, Dear be here with me, stay here with me.......
We will soar to the blue sky, it will be our dream home,
where we will roam, in the pleasant gloam,
sweet aerating wind where no one can find,
a curtain of floating clouds, a bed of mist and we both glee,
Hey, Dear be here with me, stay here with me.......
look at the stars, swirling and blinking,
In the breezy silver night, they will spread the light,
It will be dim and cold and our room of orbit,
a magnificent time we will enjoy together,
your rosy lips, on which I will kiss,
and to celebrate our love there will be a wine of dew,
as the tiny drop of dew will drop,
it will play a thrilling melody tip-top-tip-top, 
Hey, Dear be here with me, stay here with me....
when u will feel cold, I'll touch my heart to yours and will breath warmly together, holding your hands in mine will make you feel fine, and all mine!









Saturday, July 7, 2018

उन दिनों की बातें!

ये कुछ पंक्तिया बचपन की याद में. ......
वो लम्हे, वो वक़्त, वो कहानी और वो ज़िंदगानी!!
जो कल तक थी नयी और आज पुरानी!!


ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी........
थोड़ी सी मासूम और थोड़ी सी शैतना हुआ करती थी,
थोड़ी सी समझदार और थोड़ी सी नादान हुआ करती थी,
जिंदगी के रास्तो से अनजान हुआ करती थी,
चहेरे पर मुस्कराहट और दिल में तूफ़ान लिए फिरती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......

छोटे से पाऊँ और उनमे घुंगरू वाली पैजनिया हुआ करती थी,
छोटी सी कलाई में रंगीन चूड़ियाँ हुआ करती थीं,
गले में मोती वाला हार और कानो में छोटी सी बालिया हुआ करती थी,
सर पे बनी बालो की दो छोटी सी चोटी हुआ करती थीं,
और पैरो में उलटी चप्पल हुआ करती थी, 


ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......

जब मेरे फेसबुक फ्रेंड्स और सहेलियां न हुआ करती थी,
मेरे पास वो मेरी भूरे बालों वाली गुड़िया हुआ करती थी,
और उस गुड़िया से अपने दिल की हर बात साझा कर लिया करती थी,
उसको अपने गले से लगाया करती थी,
और उसी के साथ,अपनी हर रोज की छोटी सी दुनिया बनाया करती थी,

ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......

माँ  की गोद में सोया करती थी,
और माँ की मीठी अवाज में लोरियां सुना करती थी
तोतली आवाज में बात किया करती थी,
आसमान में उड़ने का तो पता नहीं,
मगर आसमान में उड़ते हवाई जहाज की आवाज को बड़े मन से सुना करती थी,
और जब तक वो आँखों से दूर आसमान की गहराइयों में न खो जाए,
तब तक उसको  देखा करती थी,

ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......

मोबाइल और कार का शौक न रखा करती थी,
छोटे छोटे खिलौने से ही खेल लिया करती थी,
सपनो की दुनिया थी और जिम्मेदारियों की खबर न थी,
जिन दासतां को आज लिख रही हूँ,
वो कल सयाजा करती थी,

ये उन दिनों की बात है जब मैं जिन्दगी की मुसीबतों से अनजान हुआ करती थी।



Friday, March 23, 2018

प्यार वाली बीमारी!!

आज की मेरी पंक्तियाँ दुनिया में फैली मुहब्बत नाम की बीमारी के नाम, आज हर कोई मुहब्बत का मारा या मारी है तो उन्ही पर मैंने ये चंद पंक्तियाँ लिखी हैं! आशा  है आपको पसंद आएँगी और आपके मन को भाएगी!!


कुछ इस तरह दुनिया पर प्यार की दीवानगी छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
और इस हद तक ये बीमारी बढ़ आयी है,
कि विज्ञान भी इसका कोई इलाज़ न ढूंढ पायी है,
जब-जब फरबरी आयी है,
उपहारों पर महंगाई आयी है,
और दुकान वालों की लॉटरी लग आयी है,
सिनेमा में हर दिन बढ़ी भीड़ उमड़ आयी है,
रेस्टोरेंट और होटलों की भी खूब कमाई है,
ये कैसी प्यार नाम की आंधी दुनिया पर छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
कभी महफ़िल तो कभी तन्हाई है,
कभी प्यार तो कभी लड़ाई है,
कभी बिन मौसम बरसात तो
कभी (आज की भाषा में) मुहब्बत वाली गर्मी छाई है,
हाये ये कैसी आवारगी दुनिया पर छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,




Saturday, March 10, 2018

काश ये दुनिया मेरी माँ जैसी होती,
मैं कुछ ना कहती और वो मेरी आँखों से मेरा दर्द समझ लेती,
काश ये दुनिया मेरी माँ जैसी होती,
मेरे मुँह से बस इक चीख निकलती और वो मेरे शब्द, मेरी बात समझ लेती,
काश ये दुनिया मेरी माँ जैसी होती,
मेरी मुस्कराहट पे मेरे साथ हँसती,मेरे रोने पे मेरे साथ रोती,
काश ये दुनिया मेरी माँ जैसी होती,










Wednesday, March 7, 2018

मैं नारी हूँ!! 👭


















✍मैं नारी हूँ पर बेचारी या दुखियारी नहीं, मैं अबला या लाचार नहीं मैं सबला हूँ!!

मैं वही संसार चलाती हूँ-2 जहाँ के लोग मुझे कुचलना चाहते है,
मैं ही माँ, बेटी, बहन, बहू और पत्नी हूँ, 
और इन सभी रिश्तों को अच्छे से निभाती हूँ,
खुद की जगह खुद बनाती हूँ,

मैं नारी हूँ पर बेचारी या दुखियारी नहीं, मैं अबला या लाचार नहीं मैं सबला हूँ!!

मैंने ही तुमको इस दुनिया में लाया, मैंने ही तुमको गोद में खिलाया,
और भूख लगने पर मैंने ही तुमको दूध पिलाया, 
मैंने ही तुमको प्यार दिया, दुलार दिया,मैंने ही तुम्हारी कलाई पर प्यार का बंधन बाँधा,
और जब तुम मुसीबतो से घिरे तो मैंने ही पत्नी बनकर तुम्हारा साथ निभाया, 
ऐसी हूँ  मैं नारी..............  

मैं नारी हूँ पर बेचारी या दुखियारी नहीं, मैं अबला या लाचार नहीं मैं सबला हूँ!!

इन गन्दी नजरों से न देखो मुझे-2 मैं नाजुक या कमजोर नहीं,
मैं लड़ने की ताकत रखती हूँ, मैं उड़ना जानती हूँ, मैं समंदर में तैरना जानती हूँ
और अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ना जानती हूँ, 

मैं नारी हूँ पर बेचारी या दुखियारी नहीं, मैं अबला या लाचार नहीं मैं सबला हूँ!!

मैं तुम्हारे बगीचे में खिला गुलाब का फूल हूँ, मगर याद रखना फूलों में कांटे भी होते है,
मुझे द्वापर युग की द्रौपदी मत समझना मैं  ईक्कीसवीं सदी की शषक्त नारी हूँ,
दुःशाशन का संघार करना जानती हूँ, मुझे पता है ये दुनिया बाजार है,
 इसलिए अब मैं औजार बन चुकी हूँ..... 

मैं नारी हूँ पर बेचारी या दुखियारी नहीं, मैं अबला या लाचार नहीं मैं सबला हूँ!!

मेरे जन्म लेने पर शर्म मत महसूस करना तुम और 
मुझे बोझ भी  मत समझना तुम मैं खुद का जीवन खुद चलाना जानती हूँ,
और हाँ,मुझ पर बंदिशे भी मत लगाना तुम.....2 
क्योकि अब मैं उन रूढीबादी बंदिशों से आजाद हूँ,

मैं अबला या लाचार नहीं मैं सबला हूँ,मैं नारी हूँ पर बेचारी या दुखियारी नहीं!!

मुझे अमीरों का  खिलौना या गरीबों की मज़बूरी मत समझना,
अब मैं हथियार बन चुकी हूँ, मुझे झूठे साथ और हमदर्दी की जरुरत नहीं,
मैं खुद अकेले चलना जानती हूँ, शेरनी हूँ इसलिए दहाड़ना जानती हूँ,

मैं नारी हूँ पर बेचारी या दुखियारी नहीं, मैं अबला या लाचार नहीं मैं सबला हूँ!!

नोट-यहाँ ऊपर की कुछ पंक्तियों में मैंने नारी के विभिन्न रूपों और उसके मह्त्व का वर्णन किया है और नीचे की कुछ पंक्तिओं में आज की शशक्त नारी की गाथा का वर्णन किया है!



This poem is dedicated to all women Mother, Daughter, Sister, Wife. You are strong more than you think of yourself. Stay safe, Wish you all a very  HAPPY WOMEN'S DAY!!👭✌✌
🠶I have put my favorite serial LAADO 2's Title image, where Anushka is fighting for women in Veerpur to empower those women who are living in a man dominant society ''Veerpur''.
   
Thanks, Hope you like it! 









Monday, January 29, 2018

बचपन की यादें .....




वो बचपन की यादे, वो मासूम सा चहेरा,
वो हँसना खिलखिलाना, वो, बात-बात पर रोना,
वो छोटा सा पलंग,और माँ के आँचल की छावों
वो पापा की डाट, और उसमे छिपा प्यार और दुलार,

आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!

वो धूल में खेलना, और मिट्टी  को खाना,
बात -बात पर रूठना और जिद करना,
वो बाबा की डाट और दादी का प्यार,
वो पतली सी गलियां,सड़को पे खेलना,

आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!

स्कूल जाना और उसके लिए रोज मां से २ रुपये की रिश्वत लेना,
वो मैडम की  डाट, मास्टर की फटकार,
वो मस्ती, दोस्तों की गपशप और कभी स्कूल से फरार,
स्कूल का नाम  और वो शीतल पेड़ों की छावों वाला गांव,

आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!

वो महेमान का घर पर आना और मुझे पैसे देना,
कितना खुश हुआ करता था मन उस छोटी सी दौलत से,
दिल कहता था की उनके इक बार कहने पर ही ले लू,
पर कुछ देर के नखरे या कहे लो बचपन वाली शराफत,

वो सब आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!

वो हांडी वाला दूध और उस पर मोटी  सी मलाई,
वो चूल्हे की रोटी, और वो आम की खटाई,
वो मक्खन और वो लाल वाली मिठाई,
वो ऊँची वाली अटारी  और मेरी कम लम्बाई,

वो आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!

वो पतली सी डगर , और खेतो की सैर,
मेरी साँप वाली पतंग,और उसकी लम्बी सी डोर,
वो पिंकी,कामिनी और रामू से उनकी पतंग काटने की होड़,
वो बड़ी वाली बातें और छोटी वाली हार,

वो आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!

पापा के साथ बाजार जाना और फिर उस छोटे से जहाज की मांग,
वो दूकान वाले भईया भी, मेरी थोड़ी सी सिफारिश कर दिया करते थे,
वो बड़ा सा तोहफा और छोटा सा दाम,

आज भी याद  आता है!
वो बचपन याद आता है !!

वो कागज़ वाली नाव और गड्ढे वाला पानी,
वो गिल्ली डंडे वाला खेल और छुक -छुक वाली रेल,
वो बचपन वाला प्यार और लंगोटिया यार,
वो छुपनचछुपाई वाला खेल और मेरी वो गुलेल,

वो सब आज भी याद आता है!
वो बचपन याद आता है!!

वो होली के रंग, वो पटाखो वाली दिवाली,
और वो छोटी सी कलाई पर रंगीन राखी,
वो रंग बिरंगे कपडे और लाला जी की मिठाई,
सर्दियों वाली मूंगफली और गर्मियों वाली कुल्फी,
वो छोटे से दिन और छोटी वाली रात,

आज भी याद  आता   है!
वो बचपन की बात याद आता  है !!



Saturday, January 13, 2018

Shooting Star and my desires!















Looking at the sky, the frozen night,
Stars filled with delight in the dreary night,
flickering and blinking,
abruptly, it appears a meteorite,

In the dreary night,
my heart is  Shirley bliss-ed out.
Plenty of cravings in mind,
deciding on all the aspirations,

craving for serenity and wealth,
for love and wisdom,
 locking my eyes quickly, with folded hands,
and pray for strength and inspirations,

smoothly open my eyes it has disappeared,
an unseen, untouched divine of light,
now, again I am alone, lost in the beauty of  the atmosphere,
heavenly, freezy air which encountered my all body.