आज की मेरी पंक्तियाँ दुनिया में फैली मुहब्बत नाम की बीमारी के नाम, आज हर कोई मुहब्बत का मारा या मारी है तो उन्ही पर मैंने ये चंद पंक्तियाँ लिखी हैं! आशा है आपको पसंद आएँगी और आपके मन को भाएगी!!
कुछ इस तरह दुनिया पर प्यार की दीवानगी छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
और इस हद तक ये बीमारी बढ़ आयी है,
कि विज्ञान भी इसका कोई इलाज़ न ढूंढ पायी है,
जब-जब फरबरी आयी है,
उपहारों पर महंगाई आयी है,
और दुकान वालों की लॉटरी लग आयी है,
सिनेमा में हर दिन बढ़ी भीड़ उमड़ आयी है,
रेस्टोरेंट और होटलों की भी खूब कमाई है,
ये कैसी प्यार नाम की आंधी दुनिया पर छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
कभी महफ़िल तो कभी तन्हाई है,
कभी प्यार तो कभी लड़ाई है,
कभी बिन मौसम बरसात तो
कभी (आज की भाषा में) मुहब्बत वाली गर्मी छाई है,
हाये ये कैसी आवारगी दुनिया पर छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
कुछ इस तरह दुनिया पर प्यार की दीवानगी छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
और इस हद तक ये बीमारी बढ़ आयी है,
कि विज्ञान भी इसका कोई इलाज़ न ढूंढ पायी है,
जब-जब फरबरी आयी है,
उपहारों पर महंगाई आयी है,
और दुकान वालों की लॉटरी लग आयी है,
सिनेमा में हर दिन बढ़ी भीड़ उमड़ आयी है,
रेस्टोरेंट और होटलों की भी खूब कमाई है,
ये कैसी प्यार नाम की आंधी दुनिया पर छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
कभी महफ़िल तो कभी तन्हाई है,
कभी प्यार तो कभी लड़ाई है,
कभी बिन मौसम बरसात तो
कभी (आज की भाषा में) मुहब्बत वाली गर्मी छाई है,
हाये ये कैसी आवारगी दुनिया पर छाई है,
जैसे कोई वायरस की बीमारी हवा में घुल आयी है,
