ये कुछ पंक्तिया बचपन की याद में. ......
वो लम्हे, वो वक़्त, वो कहानी और वो ज़िंदगानी!!
जो कल तक थी नयी और आज पुरानी!!
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी........
थोड़ी सी मासूम और थोड़ी सी शैतना हुआ करती थी,
थोड़ी सी समझदार और थोड़ी सी नादान हुआ करती थी,
जिंदगी के रास्तो से अनजान हुआ करती थी,
चहेरे पर मुस्कराहट और दिल में तूफ़ान लिए फिरती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
छोटे से पाऊँ और उनमे घुंगरू वाली पैजनिया हुआ करती थी,
छोटी सी कलाई में रंगीन चूड़ियाँ हुआ करती थीं,
गले में मोती वाला हार और कानो में छोटी सी बालिया हुआ करती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
जब मेरे फेसबुक फ्रेंड्स और सहेलियां न हुआ करती थी,
मेरे पास वो मेरी भूरे बालों वाली गुड़िया हुआ करती थी,
और उस गुड़िया से अपने दिल की हर बात साझा कर लिया करती थी,
उसको अपने गले से लगाया करती थी,
और उसी के साथ,अपनी हर रोज की छोटी सी दुनिया बनाया करती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
माँ की गोद में सोया करती थी,
और माँ की मीठी अवाज में लोरियां सुना करती थी
तोतली आवाज में बात किया करती थी,
आसमान में उड़ने का तो पता नहीं,
मगर आसमान में उड़ते हवाई जहाज की आवाज को बड़े मन से सुना करती थी,
और जब तक वो आँखों से दूर आसमान की गहराइयों में न खो जाए,
तब तक उसको देखा करती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
मोबाइल और कार का शौक न रखा करती थी,
छोटे छोटे खिलौने से ही खेल लिया करती थी,
सपनो की दुनिया थी और जिम्मेदारियों की खबर न थी,
जिन दासतां को आज लिख रही हूँ,
वो कल सयाजा करती थी,
वो लम्हे, वो वक़्त, वो कहानी और वो ज़िंदगानी!!
जो कल तक थी नयी और आज पुरानी!!
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी........
थोड़ी सी मासूम और थोड़ी सी शैतना हुआ करती थी,
थोड़ी सी समझदार और थोड़ी सी नादान हुआ करती थी,
जिंदगी के रास्तो से अनजान हुआ करती थी,
चहेरे पर मुस्कराहट और दिल में तूफ़ान लिए फिरती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
छोटे से पाऊँ और उनमे घुंगरू वाली पैजनिया हुआ करती थी,
छोटी सी कलाई में रंगीन चूड़ियाँ हुआ करती थीं,
गले में मोती वाला हार और कानो में छोटी सी बालिया हुआ करती थी,
सर पे बनी बालो की दो छोटी सी चोटी हुआ करती थीं,
और पैरो में उलटी चप्पल हुआ करती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
जब मेरे फेसबुक फ्रेंड्स और सहेलियां न हुआ करती थी,
मेरे पास वो मेरी भूरे बालों वाली गुड़िया हुआ करती थी,
और उस गुड़िया से अपने दिल की हर बात साझा कर लिया करती थी,
उसको अपने गले से लगाया करती थी,
और उसी के साथ,अपनी हर रोज की छोटी सी दुनिया बनाया करती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
माँ की गोद में सोया करती थी,
और माँ की मीठी अवाज में लोरियां सुना करती थी
तोतली आवाज में बात किया करती थी,
आसमान में उड़ने का तो पता नहीं,
मगर आसमान में उड़ते हवाई जहाज की आवाज को बड़े मन से सुना करती थी,
और जब तक वो आँखों से दूर आसमान की गहराइयों में न खो जाए,
तब तक उसको देखा करती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मै जिंदगी की मुसीबतो से अनजान हुआ करती थी.......
मोबाइल और कार का शौक न रखा करती थी,
छोटे छोटे खिलौने से ही खेल लिया करती थी,
सपनो की दुनिया थी और जिम्मेदारियों की खबर न थी,
जिन दासतां को आज लिख रही हूँ,
वो कल सयाजा करती थी,
ये उन दिनों की बात है जब मैं जिन्दगी की मुसीबतों से अनजान हुआ करती थी।